'https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js'/> src='https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js'/> पुस्तक समीक्षा : बेवक़ूफ़ लड़का

 पुस्तक समीक्षा: बेवक़ूफ़ लड़का

लेखक: रमश जोशी

प्रकाशक: राजमंगल प्रकाशन

राजमंगल प्रकाशन बिल्डिंग, 1st स्ट्रीट,

सांगवान, क्वार्सी, रामघाट रोड,

अलीगढ उप्र.-202001   

ISBN: 978-9391428495

 



किताब का नाम बेवक़ूफ़ लड़का” जब आप पढ़ते हैं तभी आपको ये पता चल जाता है कि ये किताब पूरी तरह एक से ऐसे लड़के की कहानी होगी जो अपने जीवन में बेवाकूफियाँ करता रहता होगा इस पुस्तक में ऐसी कई कहानियाँ हैं जिसके मुख्या किरदार से कुछ गलतियाँ करवाई गयी हैं और दुसरे मुख्या किरदार ने उसे बेवक़ूफ़ कहा है

पुस्तक के नाम से उलट ये कोई बेवक़ूफ़ लड़के का उपन्यास नहीं बल्कि एक कहानी संग्रह है जिसमे “नौ” कहानियों को संलग्न किया गया है पहली कहानी का शीर्षक “अजनबी लड़की” और अंतिम कहानी का शीर्षक आख़िरी ख़त है सभी कहानियाँ अलग-अलग विषयों पर आधारित है लेकिन सब कहानियों में एक नयापन ज़रूर है

एक कहानी “बूढ़े-बुढ़िया की लव स्टोरी” में एक बहुत खुबसूरत बात रमेश लिखते हैं कि “हर रोज़ इन्सान न जाने कितनी ऐसी बातें बोलने से ख़ुद को रोक लेता है; जिन बातों के बहार आ जाने से पता नहीं सामने वाला उस इन्सान के बारे में क्या सोचे या कैसा रिएक्शन दे.”

ऐसी ही बहुत खुबसूरत “लव लेटर, एंजेल नेहा, नंगा जिस्म, सट्टा किंग, टिक टॉक वाली दादी, और मेरी ज़ुबानी मेरी मौत की कहानी” आदि जैसी अन्य कहानियाँ संलग्न हैं; जो आपको मोहित कर देने का दम ख़म सख्ती हैं


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लेखक का परिचय:

रमेश जोशी 


वैसे तो रमेश जी का जन्म पहाड़ो की गोद उत्तराखंड अल्मोड़ा में हुआ है; परन्तु जन्म के 5 साल बाद जिंदगी दिल्ली ले आयी। 5वीं तक की पढ़ाई दिल्ली में की फिर जिंदगी हल्द्वानी शहर ले गयी। 8वीं तक की पढ़ाई हल्द्वानी में करने के बाद जिंदगी एक बार फिर दिल्ली ले आयी। आगे 12वीं  दिल्ली से पूरी की और कॉलेज की पढ़ाई Delhi University से खत्म की। 12वीं में पढ़ने के दौरान कहानियों और फिल्मों का चस्का लगा। इसी दौरान खूब सारी कहानियाँ और उपन्यास पढ़े। उपन्यास पढ़ते हुए धीरे-धीरे लिखना शुरू किया; इनकी लिखी कुछ कहानियाँ लल्लनटॉप, प्रतिलिपि इत्यादि जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित भी हो चुकी है।


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आपको ये किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

यदि आपको प्रेम कहानियाँ पसंद हैं और कुछ खुबसूरत कहानियों को जीना चाहते हैं तो इस पुस्तक की कहानियां आपको एक खास अनुभव करवाएंगी आपको अपने स्कूल के जीवन और अपने स्कूल के जीवन की बेवकूफियां याद करने के लिए आप इस पुस्तक की कहानियां ज़रूर पढ़ सकते हैं और अपने जीवन की खुशनुमा यादों की नदी में गोते लगा सकते हैं इस पुस्तक की अलग-अलग विषयों पर रचित कहानियाँ आपको रोमांचित ज़रूर करेंगी और मैं आशा करता हूँ कि जैसे मुझे ये पुस्तक पसंद आयी है; आपको भी पसंद आएगी


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आपको किताब में क्या कमी लग सकती है?

इस पुस्तक में वर्तनी की कमी शायद आपके पढने में बाधा बने; क्योंकि इस पुस्तक में ऐसी बहुत सारी वर्तनी की गलतियाँ हैं इसके दो कारण है; पहला कि लेखक की ये पहली रचना है और पुस्तकों के लिखने और प्रकाशित करवाने का उन्हें अनुभव नहीं है, जो इस त्रुटी का कारण हो सकता है; जिसक बारे में हम सोच सकते हैं और लेखक को थोड़ी सी छुट मिल सकती है लेकिन लेखक को इस बात का बहुत अधिक ध्यान रखना चाहिए था

दूसरी और सबसे बड़ी गलती प्रकाशक की तरफ से हुई है और वो “प्रूफ रीडिंग” की है यदि प्रकाशक ने पुस्तक प्रकाशित करने से पहले इसकी प्रूफ रीडिंग करवा ली होती तो इन त्रुटियों को सुधारा जा सकता था लेखक को इस बात का बहुत अधिक धयान रखने की ज़रूरत थी और आगे की पुस्तकों के लिए रखना चाहिए


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इस किताब से कुछ पंक्तियां जो बेहद ख़ूबसूरत हैं और दिल के क़रीब जा बसी।

 

“हर रोज़ इन्सान न जाने कितनी ऐसी बातें बोलने से ख़ुद को रोक लेता है; जिन बातों के बहार आ जाने से पता नहीं सामने वाला उस इन्सान के बारे में क्या सोचे या कैसा रिएक्शन द.”

“यादें; अच्छी हों या बुरी वो ख़ुद ब ख़ुद इन्सान के दिल में एक ऐसा कोना ढूंढ ही लेती हैं जहाँ वो सारी उम्र रह सकें

“कहीं न कहीं हर पिता के अन्दर एक पुलिस वाला ज़रूर होता है

“पता है गुरूद्वारे की सबसे अच्छी बात क्या है? – यहाँ कोई भूखा नहीं रह सकता

 

ये समीक्षा गुलशेर अहमद के द्वारा लिखी गयी है

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